आज से शुरू नवरात्रि, जानिए पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

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Neighbourhood News Desk: वैसे तो मां दुर्गा पूजा का पर्व साल में चार बार आता है लेकिन साल में दो बार ही मुख्य रूप से नवरात्रि पूजा की जाती है। प्रथम नवरात्रि चैत्र मास में शुक्ल प्रतिपदा से आरंभ होते हैं और रामनवमी तक चलती है। वहीं शारदीय नवरात्र आश्विन माह की शुक्ल प्रतिपदा से लेकर विजयदशमी के दिन तक चलती है, जिन्हें हम महानवरात्रि भी कहते है। दोनों ही नवरात्रों में देवी का पूजन नवदुर्गा के रूप में किया जाता है व पूजा विधि लगभग समान रहती है। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष के नवरात्रों के बाद दशहरा यानि विजयदशमी का पर्व आता है।

साल 2018 में शारदीय (आश्विन) नवरात्र व्रत 10 अक्टूबर से शुरू होकर 19 अक्टूबर तक रहेंगें। नवरात्री की पूजा का आरंभ करने से पहले व्रत का संकल्प लेना चाहिए। क्योंकि लोग अपने सामर्थ्य अनुसार दो, तीन या पूरे नौ के नौ दिन उपवास रखते हैं। इसलिए संकल्प लेते समय उसी प्रकार संकल्प लें जिस प्रकार आपको उपवास रखना है। इसके बाद ही घट स्थापना की प्रक्रिया आरंभ की जाती है।

10 अक्टूबर (बुधवार) 2018   : (घट स्थापन एवं  माँ शैलपुत्री पूजा,  माँ ब्रह्मचारिणी पूजा)

11 अक्टूबर (बृहस्पतिवार) 2018:  (माँ चंद्रघंटा पूजा)

12 अक्टूबर (शुक्रवार) 2018:  (माँ कुष्मांडा पूजा)

13 अक्टूबर (शनिवार) 2018:  (माँ स्कंदमाता पूजा)

14 अक्टूबर (रविवार) 2018: (पंचमी तिथि -सरस्वती आह्वाहन)

15 अक्टूबर (सोमवार) 2018:  (माँ कात्यायनी पूजा)

16 अक्टूबर (मंगलवार) 2018:  (माँ कालरात्रि पूजा)

17 अक्टूबर (बुधवार) 2018: (माँ महागौरी पूजा, दुर्गा अष्टमी)

18 अक्टूबर (बृहस्पतिवार) 2018: नवरात्री पारायण (महानवमी)

19 सितम्बर (शुक्रवार) 2018:  (दुर्गा विसर्जन, विजयादशमी) दशमी

शैलपुत्री की पूजा का विधि-विधान

मां शैलपुत्री का दर्शन कलश स्थापना के साथ ही प्रारम्भ हो जाता है। नवरात्र व्रत में नौ दिन व्रत रहकर माता का पूजन बड़े ही श्रद्धा भाव के साथ किया जाता है। लेकिन जो लोग नौ दिन व्रत नहीं रह पाते वे सिर्फ माता शैलपुत्री का पूजन कर नवरात्रि का फल पा सकते है।

ऐसा है मां शैलपुत्री का स्वरुप

आदि शक्ति ने अपने इस रूप में शैलपुत्र हिमालय के घर जन्म लिया था, इसी कारण इनका नाम शैलपुत्री पड़ा। शैलपुत्री नंदी नाम के वृषभ पर सवार होती हैं और इनके दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का पुष्प है।

माता की उपासना के लिए मंत्र:

वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।

वृषारुढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥

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