छोटी उम्र में खड़ी की 28 हजार करोड़ की कंपनी

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Neighbourhood Desk: हौसले बुलंद हो तो आपको ना कोई उड़ने से रोक सकता है और ना ही मीलों लंबी छलांग लगाने से। इस कहावत को महज 17 साल की उम्र में सच कर दिखाना कोई आसान बात नहीं। रितेश अग्रवाल ने छोटी उम्र में ही बड़े-बड़े सपने देखना और उन्हें सच कर दिखाना। आज उनका सपना भारत ही नहीं बल्कि चीनी बाजार में भी काफी अच्छी जगह बना चुका है। रितेश अग्रवाल और कोई नहीं भारत की प्रमुख होटल चेन ओयो के फाउंडर हैं। जिनकी कामयाबी की कहानी के बारे में हर युवा को एक बार जानना तो जरूर चाहिए।

रितेश ने करीब 10 महीने पहले चानी बाजार में ओयो सर्विस को उतरा था। आज ओयो वहां के 50 शहरों में 50हजार से भी ज्यादा कमरें संचालित कर रहा है और बुकिंग भी 20-25 फीसदी से बढ़कर 60-65 फीसदी हो गई है। इंजीनियरिंग की पढ़ाई छोड़ने वाले रितेश आज 40 करोड़ डॉलर की कंपनी के मालिक हैं। कम उम्र में इतना बड़ा मुकाम पाना, हर किसी के लिए संभव नहीं, लेकिन इरादे मजबूत हों तो आपको कोई रोक भी नहीं सकता। बिना किसी की मदद के शुरू किए गए इस कारोबार को आज रितेश चीन जैसे शक्तिशाली देश में भी ले गए हैं।

रितेश का जन्म ओडिशा के बिस्सम कटक गांव का है और वो बिल गेट्स, स्टीव जॉब्स और मार्क जुकरबर्ग से बहुत इंस्‍पायर रहे हैं। रितेश, वेदांता के अनिल अग्रवाल को अपना आदर्श मानते हैं। आम युवाओं की तरह वो भी कॉलेज गए, फिर अपना सपना पूरा करने आईआईटी में इंजीनियरिंग की सीट हासिल करनी चाहिए लेकिन निराश हुए। इसके बाद यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन में दाखिला लिया और उसके दिल्‍ली कैंपस में महज दो दिन जाकर पढ़ाई छोड़ दी।

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पहले तो उनके मां-बाप को रितेश का यूं कॉलेज से ड्रॉपआउट करना अच्छा नहीं लगा। लिहाजा उन्हें पहले बहुत समझाया भी लेकिन बाद में जब उन्‍हें रितेश का आइडिया समझ आया तो फिर उसमें उसका पूरा साथ दिया। रितेश अग्रवाल के बिजनेस माइंड ने उनसे सिम बेचने का काम भी करवाया। साल 2009 में रितेश पर घूमने का शौक चढ़ा और वो देहरादून, मसूरी घूमने पहुंच गए। इन जगहों की खूबसूरती ने रितेश को होटल का आइडिया दिया। रितेश ने एक ऑन्‍लाइन कम्‍यूनिटी बनाने के बारे में विचार किया जो ऐसी जगहों पर टूरिस्‍ट को बेड एंड ब्रेकफास्ट प्रोवाइड करे। फिर 2011 में उन्होंने ओरावेल नाम से कंपनी की शुरुआत की। रितेश के आइडिया से इंप्रेस होकर गुड़गांव के मनीष सिन्हा ने भी ओरावेल में इनवेस्‍ट किया और वो इसके को-फाउंडर बन गए। 2012 में ओरावेल को एक और उड़ान मिली जब देश के पहले एंजल आधारित स्टार्ट-अप एक्सलेरेटर वेंचर नर्सरी एंजल से बुनियादी पूंजी प्राप्त हुई। अपनी कंपनी को खड़े रखने में रितेश को काफी मेहनत करनी पड़ी। लेकिन उन्‍होंने अपना सपना धीरे-धीरे ही सही पर पूरा किया।

होटल रूम प्रोवाइड करने वाली इस चेन में जल्‍द ही नए इनवेस्‍टर्स जुड़ सकते हैं। साथ ही ओयो ने सॉफ्टबैंक समेत मौजूदा इनवेस्टर्स और हीरो एंटरप्राइज से 25 करोड़ डॉलर की नई फंडिंग हासिल की है। कंपनी इस फंड का प्रयोग भारत और दक्षिण पूर्व एशिया में मौजूदगी बढ़ाने के लिए करना चाहेगी। इस नई फंडिंग के बाद रितेश की कंपनी की वैल्यूएशन करीब 90 करोड़ डॉलर यानी 6000 करोड़ रुपए पहुंचने की उम्मीद है। कम कीमत पर बेहतरी होटल रूम्‍स अवेलेबल कराना यही ओयो का प्रॉमिस है।

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